वाह! मुक्कू, तेरा जज्बा

जयपुर के अब्दुल मुकति उर्फ मुक्कू की दाद देनी होगी। आठ साल के इस बालक ने अबुधाबी में पॉलिथीन बैग्स के खिलाफ जो अभियान छेड़ा है, उससे वह सबकी आंखों का तारा बन गया है। इस अभियान का असर यह हुआ कि काफी लोग पॉलिथीन बैग्स के बजाय कागज के बैग्स इस्तेमाल करने लगे हैं।

टीवी पर एक विज्ञापन आता है। इसमें लाइट्स पर कार बंद नहीं करने पर उसमें बैठा एक बालक अपने पिता से कहता है-मैं बड़ा होकर साईकिल रिपेयरिंग की दुकान खोलूंगा। यह बात सुनकर पिता हतप्रभ होता है। लेकिन बालक अपनी बात आगे बढ़ाता है-आप लोग जिस तरह पेट्रोल की बरबादी कर रहे हैं, उससे तो कुछ समय बाद पेट्रोल ही नहीं बचेगा। इस पर पिता तत्काल ही लाइट्स पर अपनी कार रोक देता है। यह बात तो सिर्फ विज्ञापन की है, लेकिन असली जिंदगी में आछ साल का बालक अब्दुल मुकति कुछ इसी स्टाइल में पर्यावरण बचाने की मुहिम चला रहा है।

मुकति का यह अभियान इसीलिए लाजवाब है, क्योंकि जब ज्यादातर लोग पर्यावरण के खतरों से वाकिफ होते ही अनजान बने हैं, तब यह बालक अपने अभियान से लोगों को पर्यावरण बचाने की सीख दे रहा है। उसके इस ‘नो पॉलिथीन बैग’ अभियान में 50 स्कूलों के लगभग एक हजार नन्हे-नन्हे बालक जुड़े हैं। ये बच्चे कागजों के बैग्स बांट कर आमजन और दुकानदारों को पॉलिथीन बैग्स का इस्तेमाल नहीं करने का संदेश दे रहे हैं। इसके लिए मुकति को संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख अखबार गल्फ न्यूज ने सम्मानित कर उसकी खबर प्रमुखता से प्रकाशित की।

मुकति को पॉलिथीन बैग्स के खिलाफ अभियान की प्ररेणा अपने स्कूल में ही मिली। कुछ समय पहले पर्यावरण दिवस पर पॉलिथीन बैग्स के इस्तेमाल से पर्यावरण को होने वाले खतरों की बात मुकति के दिलो-दिमाग में बैठ गई। उसने तभी संकल्प किया कि वह पर्यावरण को बरबाद होने से बचाने के लिए अभियान चलाएगा। बकौल मुकति, मैंने घर पर कागजों को एकत्रित कर उसके बैग्स तैयार किए और आसपास के शॅपिंग सेंटरों पर गिफ्ट कर दिए।

इन प्रयासों को सराहा गया। इससे नन्हे मुकति को हौसला मिला। इसके बाद वह रोजाना दो घण्टे का समय निकालकर कागज के बैग्स बनाने शुरू कर दिए। वह इन्हें आसपास के दुकानदारों में बांट देता। मुकति के प्रयासों की धीरे-धीरे चर्चा होने लगी। मुकति को देखकर उसके सहपाठी भी कागज के बैग्स तैयार करने लगे। इस अभियान को अबुधाबी में जबरदस्त जनसमर्थन मिला और दुकानदारों में मुकति के बैग्स की मांग बढऩे लगी। मुकति के अनुसार हम लगभग एक हजार छात्र रोजाना समय निकाल कर इस तरह के बैग्स बनाते हैँ।

मुकति की मां अंदलीब मनान का कहना है कि उन्हें भरोसा ही नहीं होता कि आठ साल का एक बच्चा इतना बड़ा अभियान चला सकता है। जब हम मुकति के प्रयासों को देखते हैं तो बड़ा गर्व होता है। मुकति ने अन्य बच्चों को जोडऩे के लिए कागज की फैँसी ड्रेस बनाई। इससे काफी बच्चे आकर्षित हुए और उसके साथ जुड़ते चले गए। किसी अच्छे काम के लिए कोई आयु नहीं होती, बस प्ररेणा की जरूरत होती है।

टैग:

2 Responses to “वाह! मुक्कू, तेरा जज्बा”

  1. vinay Says:

    सही कहा, किसी अच्छे काम के लिये उम्र की सीमा नहीं होती ।

  2. yashwant Says:

    आठ साल के महान पर्यावरण सैनिक को हमारा सलाम

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s


Follow

Get every new post delivered to your Inbox.