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वो कहानी, ये हकीकत

जनवरी 16, 2010

अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘पा’ में प्रोजेरिया से पीडि़त ऑरो के दर्द से आप सभी वाकिफ है, लेकिन हकीकत जिंदगी में भी इसी कष्टदायक बीमारी से चार साल के अमित की सांसे बंधी है। यह बालक राजस्थान में झुंझुनूं का रहने वाला है और उसे तकलीफ बढऩे पर जयपुर के जेकेलोन अस्पताल में लाया गया। 

अस्पताल आने के बाद इस बालक की एमआरआई जांच की गई। जिसमें पता चला कि उसकी खून की नसें सिकुड़ गई है। इससे हाथ-पैरों में कमजोरी आ रही थी। उसके खून का दौरा बढ़ाने व खून की नसों को खोलने की दवा दी जा रही है। शरीर का विकास कम होने के कारण उसे अस्पताल के मैलन्यूट्रीशन सेंटर में रखा गया,  जिसमें एमएनडीटी के तहत विशेष खुराक दी गई। घर पर भी उसे ऐसी ही खुराक देने की सलाह दी गई है ताकि उसका वजन बढ़ सके। फिलहाल उसे अस्पताल से छुïट्टी दे दी गई है।

अमित के पिता राजपाल सिंह टैक्सी ड्राइवर हैं। जयपुर के जेकेलोन अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती अमित के साथ उसकी मां अनीता भी आई थी। अनीता का कहना है कि उनका छोटा बेटा पूरी तरह स्वस्थ है, मगर अमित में दो साल की उम्र से इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे थे। चार साल का अमित उम्र से पांच गुना बड़ा दिखता है।

होगा रजिस्ट्रेशन
जेकेलोन अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अशोक गुप्ता ने बताया कि इस बालक का वल्र्ड प्रोजेरिया रजिस्टर्ड में रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। इस बालक में मिले लक्षणों व अन्य सभी बातों को उसमें दिया जाएगा। ताकि भविष्य में यह शोध के रूप में काम आ सके। जन्म के समय ही ऐसे बच्चों में इस बीमारी की पहचान सम्भव है। ऐसे बच्चे जन्म के वक्त सामान्य नजर आते हैं। मगर उनकी नाक तराशी हुई होती है, चमड़ी के अंदर त्वचा जगह-जगह से मोटी व खुरदरी होती है। उम्र के दूसरे साल में शरीर के सारे बाल गायब हो जाते हैं, चमड़ी के नीचे का फेट गायब हो जाता है। 

ये है प्रोजेरिया
यह दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है। 80 लाख बच्चों में से एक में इसके लक्षण दिखाई देते हैं। आज तक चिकित्सा जगत में प्रोजेरिया के करीब 100 मामले सामने आए हैं। फिलहाल पूरी दुनिया में प्रोजेरिया के 35-40 ज्ञात मामले हैं। प्रोजेरिया का अभी तक कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। अमरीका व कई यूरोपीय देशों में इस पर शोध चल रहा है, मगर सफलता नहीं मिल पाई है। फिलहाल चिकित्सक इस रोग के उपचार के बजाय इसकी वजह से होने वाली शारीरिक बीमारियों का इलाज करते हैं ताकि बच्चा ज्यादा से ज्यादा समय तक जिन्दा रह सके। ऐसे बच्चों की मौत ज्यादातर बुढ़ापे में होने वाली बीमारियों से होती है।

कारणों पर शोध
प्रोजेरिया बीमारी के कारणों पर अभी शोध जारी है। फिलहाल ये माना जाता है कि एलएमएनए जीन में म्यूटेशन (आकस्मिक बदलाव) के कारण ये बीमारी होती है। पीडि़त बच्चों के उम्र के शारीरिक लक्षण 5-6 गुना तेजी से दिखाई देते हैं। यानी 2 साल के बच्चे के शारीरिक लक्षण 10-12 साल के बच्चे जैसे होते हैं। हालांकि उनका मानसिक विकास किसी सामान्य बच्चे जैसा होता है। ऐसे बच्चे औसतन 14 साल की आयु तक ही जिन्दा बच पाते हैं। उम्र के शारीरिक लक्षणों के कारण इस उम्र तक आते-आते उनकी मौत हो जाती है।

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